गर्मी की तेज़ धुप में , मैं पेड़ की निर्मल छाया बन जाउंगी।
तू आकर मेरी छाया में बैठने का वादा तो कर॥
सावन की बारिश में, मैं खुशियों की बौछार लेकर आउंगी।
तू मेरी बौछार में भीगने का वादा तो कर॥
ठण्ड के कड़कते मौसम में, ख़ुद लकड़ी बन जल जाउंगी।
मेरी गर्मी में अपने हाथ तापने का वडा तो कर॥