आज जब रोटियां बनाते-बनाते मेरे हाथ जल गए,
पर इसकी परवाह किये बिना मैंने पूरा खाना बनाया,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब सिलाई करते-करते मेरे हाथ में सुई चुभ गयी,
लेकिन फिर भी मैंने पापा की पूरी कमीज़ की पूरी बांह सिली,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब रोटी ख़तम हो जाने पर,
मैंने खुद बासी रोटी खायी,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब पापा की दवाइयों का पूरा समय,
मुझे याद हो गया,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब खुद की पसंद छोड़,
मुझे सबकी पसंद याद हो गयी,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब सबको गर्म खाना खिलाकर,
मैंने खुद ठंडा खाना खाया,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
आज जब दिनभर के काम के बाद,
मैंने सुबह पांच बजे का अलार्म लगाकर लेती,
मैंने माँ को अपने अन्दर उतरते महसूस किया!!
शायद मैं बड़ी हो रही हूँ.....
... vaah vaah ... kyaa baat hai .... behatreen rachanaa ... badhaai !!!
ReplyDeletedhanyawaad janab......
ReplyDeleteBahut hi sateek Kavita Likhi hai aapne.....
ReplyDeleteHeart Touching......
shukriya ji....
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