AASHAYEIN
Thursday, June 3, 2010
और कुछ नहीं दिया.....
रात न जाने कब करवटों में निकल गयी,
एक मेरी आँख थी जो सोना भूल गयी।
हाँ रोना उसे याद है,
क्योंकि तुम्हारी मधुरता ने उसे आंसुओं के अलावा और कुछ नहीं दिया है.
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