करके शादी का वादा,
सपने तुमने दिखाए।
विश्वास नहीं था,
तो क्यों ज़िन्दगी में आये?
बेपनाह मोहब्बत है,
ये ही तो तुमने कहा था।
चले गए तुम,
क्या ये ही हमारे प्यार का फलसफा था?
इश्वर को साक्षी मानकर,
जो तुमने मुझसे वाडे किये।
मेरे तन-मन को नोचकर,
फिर क्यों तुम खा गए?
गलत तुमने किया,
षड़यंत्र तुमने रचा।
एक कच्ची कलि को तोड़कर-मसलकर,
एक खूबसूरत फूल को क्यों तुमने नहीं बनने दिया?
तुम ही हो जो बर्बाद कर गए,
एक कोमल ज़िन्दगी की सुरम्य सरगम।
फिर क्यों बदनाम,
स्त्री चरित्रं?
Sunday, December 19, 2010
Thursday, December 16, 2010
Friday, December 10, 2010
Thursday, December 9, 2010
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