आज दिल फिर ले आया मुझे उस मोड़ पर,
जहाँ मैं खड़ी थी तनहा, अकेली,
लेकर एक गुलाब की पंखुड़ी ,
जिस पर लिखा था नाम बस तुम्हारा......
याद आ गयी मुझे वो दिसम्बर की सर्दी,
होती थी मेरे भीगे लबों पर,
तुम्हारे प्यारे से साथ की अठखेली........
आज न है वो सर्दी न गर्मी,
बस मैं हूँ तन्हां अकेली,
सिर्फ इस इंतज़ार में की तुम आओगे,
क्यूंकि मैं हूँ तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी......
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