Sunday, October 31, 2010
नानी की हद
नमस्कार.... बहुत महीनो बाद आई हु यहाँ कुछ लिखने.... काम और पढाई ने इस छोटी सी जान को इतना व्यस्त कर दिया क वक़्त ही अनहि मिला कुछ लिखने का.... लेकिन आज कुछ ऐसा घटा की मैं अपने आप को नहीं रोक पायी अपने ब्लॉग का रास्ता भूलने से.... तो जनाब हुआ यूँ के दिवाली के दिन आ रहे हैं नज़दीक और घर की साफ़-सफाई बड़ी ही ज़ोरों पर है.... आब आप ये पूछेंगे की यार साफ़-सफाई में ऐसा क्या घटित हो गया जिसने मुझे इतना बेचैन कर दिया की मैं यहाँ औं और उसके बारे में लिखूं... तो देर न करते हुए हम वाकये की तरफ अपना रुख करते हैं.... आज सुबह घर के बहार खड़ीमैं अप्ना काम कर रही थी, मेरे गहर के सामने रहने वाले एक बच्चा मेरे पास आया और बोला की मेरा जन्मदिन आने वाला है.... मैंने ख़ुशी से उसको बधाई दी इनऔर पुछा की वो जन्मदिन कैसे mana राह है..... उसकी मम्मी भी वही खड़ी हुई थी और बताने लगी की उसकी नानी की तबियत थोड़ी ख़राब है तो मैंने उस बच्चे से कहा की वो अपनी नानी के पास जाकर अप्ना जन्मदिन क्यों नहीं मनाता... इस पर जो उसने कहा वो मेरे लिए आशार्यजनक था.... उसके शब्द कुछ इस प्रकार थे... "मैं नानी को बस उनकी हद में रखता हूँ और मेरे जन्मदिन पर बस उनको तोहफा देने का हक मैंने दिया है इससे ज्यादा हद पार नहीं करने दे सकता मैं unhe"...... अवाक रहकर मैं बस यही सोच रही थी..... क्या नानी की कोई हद होती है????? क्युकी मैंने कभी ये नहीं सीखा के अपने से बड़ों की कोई हद होती है.... शायद मैं कुछ पुराने विचारों वाली हूँ..... ये तो जनाब नए ज़माने की पाश्चात्य सभात्या को मानने वाली YO पीढ़ी है जिसे शायद ये ही संस्कार मिले हैं..... सोचकर कुछ डर लगता है ये पीढ़ी कैसे है??????? कहीं ये हमारी सभात्या के पतन का संकेत तो नहीं???????
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