Saturday, December 10, 2011

काश ये बात तुमने समझी होती

मेरे दिल की जुबान कोई पढ़ ना पाया,
ये क्या चाहता है कोई सुन ना पाया,

चीख-चिल्ला कर रह गया मेरा अंतर्मन,
पर कहीं नज़र ना आई कोई आशा की किरण,

तुम कहते हो मैंने कभी कोई बात नहीं कही,
पर क्या कभी तुमने सुनने की कोशिश भी की?????

क्या सिर्फ जुबां ही कहने का माध्यम है?????
मेरी आँखों में भी तो तुम्हारे लिए प्रेम है ,

सच्चे प्यार को कभी जुबां की ज़रूरत नहीं होती,
काश ये बात कभी तुमने भी समझी होती..........














Thursday, December 8, 2011

जितनी शिद्दत से आज तुम मेरे चरित्र पर लांचन लगा रहे हो.....
अगर उतनी ही शिद्दत से मुझे जाने की कोशिश की होती.....
तो...... तो आज इन शब्दों की हमारे बीच में कोई जगह नहीं होती......