Sunday, July 26, 2009

पर्यावरण संरक्षण और बड़े लोग.....

सौभाग्य से आज मुझे एक कार्यक्रम में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। ये कार्यक्रम था पर्यावरण को बचने के कुछ प्रयासों का। वैसे मैं ख़ुद भी पर्यावरण प्रेमी हूँ..... तो ये जानकर की वहां वृक्षारोपण भी होगा..... मन को बहुत तसल्ली हुई। मैंने भी एक पौधा लिया और चल दी कार्यक्रम में। खैर वहां पहुंचकर जो एहसास हुआ, उसे कुछ पंक्तियों में बयां करना चाहूंगी.... ज़रा गौर फरमाइयेगा जनाब :-

मन को मेरे कुछ ज़यादा ही सुकून आया,
जब हरियाली को व्याप्त मैंने चारों ओर पाया।
हरे रंगों में सुसज्जित शहर के नागरिक गन्न्मान,
कर रहे थे अपने "status" का बखान।

खैर अब तक तो आप जान ही गए होंगे की वहां का माहौल देखकर मेरे मन को कितना सुकून मिला होगा...... अक्सर ऐसे कार्यक्रमों में लोग "theme" के हिसाब से कपड़े पहनते हैं.... अब आज की ही बात ले लीजिये, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यक्रम था तो हरे कपड़ों में लोग आए थे। वहां पर पाश्चात्य सभ्यता का जमावड़ा सा लगा हुआ था और पर्यावरण तो बस किसी कोने में चुप्पी साधे बैठा था...... हाँ कोने में एक छोटा सा पौधा रखा तो हुआ था...... अब भई मैने तो सोचा था की आज के इस पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम का लीड ऐक्टर वो पौधा होगा.... पर यहाँ तो बंधू माजरा ही उल्टा निकला जी....... ये बेचारा पौधा तो जूनियर आर्टिस्ट बना पड़ा है..... और कुछ "बड़े लोग" ही कार्यक्रम का मजमा लूट रहे हैं और माहौल खींच रहे हैं। और बिचारा वो पौधा तो लोगों के ज़िक्र में भी नही आ रहा था। खैर इस बात से तो मेरा ध्यान तब भंग हुआ जब कुछ जान-पहचान वाले लोगों की आवाजें आयीं। अब भई मैं भी तो "बड़े लोगों" की श्रेणी में आने लगी हूँ....... अब इसे अपनी खुशकिस्मती कहूँ या बदकिस्मती बस ये ही नही समझ पा रही हूँ। खैर इस उधेदबुन्न में ही थी मैं के फोटोग्राफर ने फोटो के लिए कहा। अब मैं जो की बड़े लोगों की श्रेणी में नई ही हूँ तो हतभ्रत सी खड़ी हो गई...... कमाल तो तब हुआ जब फोटोग्राफर ने मुझसे कहा के "मैडम पौधे को अपने हाथ से हटा दीजिये.... लुक ख़राब ही रहा है आपकी फोटो का"..... खैर अब तो मेरे पौधे को मुझ से जुदा कर दिया गया..... फोटो का सिलसिला ख़तम हुआ और बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया..... उसमे भी पर्यावरण और पौधों का ज़िक्र तो था नही..... हाँ "jewellery, saree" ये सब ज़रूर था। खैर कार्यक्रम शुरू हुआ और पर्यावरण को छोड़कर हाँ संस्था की तारीफ़ करने में ही लगे हुए थे संस्था के कार्यकर्ता। किसी तरह मैंने वो भी झेला...... चलिए वो वक्त भी आ गया जब वृक्षारोपण होना था। अब पौधे को लाया गया..... सबका ध्यान उस नन्हे से पौधे पर गया..... मैंने सोचा की अब ये जूनियर आर्टिस्ट लीड रोल में आएगा .... लेकिन अफ़सोस मैं ग़लत साबित हुई जब माहौल अभी भी "बड़े लोग" ही खींच रहे थे....... बस औपचारिकता के लिए गड्ढा कर के पौधे को रोप दिया गया और फोटो सेशन शुरू हो गया । खैर फोटो खिंच गई और कार्यक्रम खत्म हुआ। मैंने अपना समान उठाया और निकलने लगी घर की ओर..... चलते-चलते मेरा ध्यान एक जगह पर रुक गया। ये वही जगह थी जहाँ पर पौधा रोपा गया था..... संस्था के कार्यकर्ता उधर खड़े होकर हँसी-मज़ाक कर रहे थे..... उन्होंने तो ध्यान नही दिया पर मैंने दिया..... अपने हँसी-मज़ाक में वो पौधे को कुचल बैठे थे। बेचारा पौधा कराह रहा था दर्द में और मुझे ये पर्यावरण को बचाने का कार्यक्रम कम और क्रियाकर्म ज़्यादा लग रहा था.... आज मुझे लग रहा था की मैं कितनी बदकिस्मत हूँ जो इन तथाकथित "बड़े लोगों" की श्रेणी में आती हूँ। अब आप मुझसे पूछेंगे की मेरे वाले पौधे का क्या हुआ..... तो बंधू वहां पर काम करने वाले एक अदने से चौकीदार की बिटिया का जन्मदिन था.... तो मैंने वो पौधा उसे उपहार में दे दिया..... और उसे कहा की हर जन्मदिन पर एक पौधा ज़रूर लगाये...... खैर अब ये काम तो संस्था वालों का था..... चलिए मैंने कर दिया.... कोई बात नही।

जाते-जाते मेरे कानों में संस्था के कार्यकर्ताओं के हँसी-ठहाके गूँज रहे थे....... और हाँ मैं ख़ुद भी आज अपने ऊपर हंस रही थी.... क्योंकि आज मेरा स्वागत हो चुका था "elite class" में......

2 comments:

  1. Fantastic!!!

    कृपया वर्ड वैरिफिकेशन की उबाऊ प्रक्रिया हटा दें !
    लगता है कि शुभेच्छा का भी प्रमाण माँगा जा रहा है ।
    इसकी वजह से प्रतिक्रिया देने में अनावश्यक परेशानी होती है!

    तरीका :-
    डेशबोर्ड > सेटिंग > कमेंट्स > शो वर्ड वैरिफिकेशन फार कमेंट्स > सेलेक्ट नो > सेव सेटिंग्स

    ReplyDelete
  2. mere khayaal se ye shayad aajkal ke saare 'saamajik uthaan' ke karyakramo me aam baat ho gayi hai,
    ye sirf "Elite Class" ke logo ko apni photos subah ke paper me dekne ki ichha ke alawa aur kuch nahi hai,
    jo bhi paryavaran sanrakshan karna chata hai use kisi bi samaroh ki aawashyakta nahi hai

    ReplyDelete

Note: Only a member of this blog may post a comment.