Thursday, December 9, 2010

चलो हम आज एक घर बनाते हैं,
प्रेम के इंटों से उसे सजाते हैं,
तेरी-मेरी वफ़ा के रंगों से भरा,
चलो आज एक आशियाना बनाते हैं......

2 comments:

  1. ... bahut khoob ... behatreen ... badhaai !!!

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  2. दिलों के तार जब बजने लगें, मन के घरौंदे में
    समझ जाना, यही अब हमारा आशियाना है !

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