Friday, August 5, 2011

आज भी सिर्फ तुम्हारे लिए....

ग़ज़लों की ये स्वर लेहेरियां,
पेड़ों पे सरसराती ये पत्तियां,
एहसास कराती हैं की मेरा दिल आज भी धड़कता है....

नदी में हिचकोले खाती ये लेहेरें,
सुहाने मौसम में चलती ये ठंडी हवाएं,
एहसास कराती हैं की मेरा दिल आज भी धड़कता है....

जानते हो किसके लिए????

आज भी सिर्फ तुम्हारे लिए.....

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