कुछ पंक्तियाँ बन रही हैं ज़ेहन में बस यूं ही...... इनके बारे में आपके जो ख़यालात हैं उनसे वाकिफ ज़रूर करवाईयेगा...... हाँ जी.... तो पंक्तियाँ कुछ यूं हैं की........
न जाने कुछ तो है तुम्हारी आँखों में,
जब भी मुझ पर पड़ती हैं,
मेरे अन्दर की नारी लजाने लगती है.....
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