ये कुछ पंक्तियाँ मेरे मित्र ने लिखी हैं..... आपके सब को पेश कर रही हु....
ए काश ..काश तू होता ..हर शाम अगर तू मेरे साथ होता.. डूबते हुए सूरज की लालिमा जेसे तेरे इस हसीं चेहरे को मैं अपने दिल में समां लेता , फूल की पंखडियो जेसी तेरी इस मुस्कराहट को मैं देखता रहता , तेरी एक हंसी के लिए मैं कुछ भी कर जाता ..हर शाम अगर तू साथ मेरे होता .. तो तुम्हे जो पसंद he वो बातें मैं करता , तुम्हे जो पसंद है वो गाना मैं गुनगुनाता , तुम्हे जो है पसंद वो तोहफा मैं तेरे लिए लता......
हर शाम अगर तू साथ मेरे होता ..तो अपने सीने पे सर रखके तुमको मैं सोने देता , आँखों पे आ गई तेरी जुल्फों को मैं कान के पीछे ले जाता , शरबती तेरी इस गुलाबी आँखों को मैं पीता रहता....हर शाम अगर तू साथ मेरे होता बाते तेरे साथ मैं हजारों करता , खूब हंसाता तुमको मैं और मैं भी हँसता, खोये हुए अपने वजूद को मैं कहीं से ढूंढ लाता.......
हर शाम अगर साथ तू मेरे होता .. तो लम्बी सी सड़क पे घुमाने मैं तुमको ले जाता , रास्ते में ice cream और पानीपूरी भी खिलाता , घर तक तुम्हे मैं छोड़ने आता और दुसरे दिन मिलने का वादा मैं लेता ..हर शाम अगर साथ तू मेरे होता .. तो दिल न मेरा यूँ बेबस , उदास होता , चुपचाप तुम्हे याद करके यूँ आन्हे न भरता , आँखों में आंसू के मोती न पिरोता ..ए काश ..काश यूँ होता हर शाम अगर साथ तू मेरे होता .......
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